MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है और सरकारी ख़रीद केंद्र पर कैसे बेचें

न्यूनतम समर्थन मूल्य — मरुधरा किसान
५ मिनट का पठन

हर साल बुवाई के समय यह सवाल उठता है — कौन सी फसल बोएं? और हर साल कटाई के समय दूसरा सवाल — भाव गिर गया तो क्या होगा?

न्यूनतम समर्थन मूल्य इसी दूसरे सवाल का जवाब है। यह वह न्यूनतम दाम है जिस पर सरकार आपकी उपज ख़रीदने का वादा करती है, चाहे खुले बाज़ार में भाव कितना भी गिर जाए।

एमएसपी होता क्या है

सीधे शब्दों में — एक सुरक्षा जाल। अगर मंडी में सरसों का भाव एमएसपी से नीचे चला जाए, तो आप सरकारी ख़रीद केंद्र पर जाकर एमएसपी पर बेच सकते हैं।

यह दाम हर सीज़न की बुवाई से पहले घोषित किया जाता है। इसके पीछे मक़सद यह है कि किसान को पता हो कि कम से कम इतना दाम तो मिलेगा ही, और वह उसी हिसाब से फ़सल चुन सके।

तय कैसे होता है

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) हर फसल की लागत का आकलन करता है और सिफ़ारिश भेजता है। लागत निकालते समय ये बातें जोड़ी जाती हैं:

  • बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई का ख़र्च
  • किराए की मज़दूरी और मशीनरी का ख़र्च
  • परिवार के सदस्यों के श्रम का मूल्य
  • अपनी ज़मीन का किराया और पूंजी पर ब्याज

सरकार की घोषित नीति यह रही है कि एमएसपी लागत से एक तय प्रतिशत ऊपर रखा जाए। अंतिम फ़ैसला केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति करती है।

किन फसलों पर लागू है

एमएसपी खरीफ और रबी दोनों सीज़न की कई फसलों के लिए घोषित होता है। बीकानेर संभाग के लिहाज़ से ये प्रमुख हैं:

  • खरीफ — बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार की जगह बोई जाने वाली दलहन, मूंगफली, तिल, कपास
  • रबी — गेहूं, जौ, चना, सरसों, मसूर

एक ज़रूरी बात: एमएसपी घोषित होना और सरकारी ख़रीद होना, दो अलग बातें हैं। घोषणा सभी अधिसूचित फसलों के लिए होती है, लेकिन असल ख़रीद तय मात्रा, तय केंद्रों और तय अवधि में ही होती है।

ख़रीद केंद्र पर बेचने की प्रक्रिया

चरण 1: पंजीकरण

ख़रीद शुरू होने से पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है। राजस्थान में यह आमतौर पर राजफेड या संबंधित एजेंसी के पोर्टल और ई-मित्र केंद्रों के ज़रिए होता है।

पंजीकरण के लिए चाहिए:

  • जनाधार कार्ड
  • आधार कार्ड
  • ज़मीन की जमाबंदी की नकल
  • गिरदावरी रिपोर्ट, जिसमें बोई गई फसल दर्ज हो
  • बैंक पासबुक की प्रति

पंजीकरण की सीटें सीमित होती हैं और जल्दी भर जाती हैं। तारीख़ की घोषणा होते ही पंजीकरण करवा लें, आख़िरी दिन का इंतज़ार न करें।

चरण 2: तुलाई की तारीख़

पंजीकरण के बाद आपको एसएमएस से तारीख़ मिलती है। उसी दिन उपज लेकर केंद्र पर पहुंचना होता है। तारीख़ चूक गए तो दोबारा नंबर आने में लंबा इंतज़ार हो सकता है।

चरण 3: गुणवत्ता की जांच

यह सबसे अहम चरण है और यहीं ज़्यादातर किसान अटकते हैं। केंद्र पर नमूना लेकर जांच होती है:

  • नमी की मात्रा — हर फसल के लिए अधिकतम सीमा तय है
  • टूटे और सिकुड़े दानों का अनुपात
  • मिट्टी, कंकड़ और दूसरी मिलावट
  • रंग और दाने का आकार

नमी सबसे बड़ा कारण है जिससे उपज लौटाई जाती है। केंद्र पर ले जाने से पहले उपज को अच्छी तरह सुखा लें। एक-दो दिन की अतिरिक्त धूप पूरा सौदा बचा सकती है।

चरण 4: तुलाई और भुगतान

गुणवत्ता पास होने पर तुलाई होती है और रसीद मिलती है। भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है, आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्तों के भीतर।

रसीद संभालकर रखें। भुगतान में देरी होने पर यही आपका प्रमाण है।

ध्यान रखने वाली बातें

  1. गिरदावरी में जो फसल दर्ज है, वही बेच सकते हैं। गिरदावरी सही करवाना पहले ज़रूरी है
  2. पंजीकरण में रकबा सही भरें — ज़्यादा भरने पर सत्यापन में अटक सकते हैं
  3. एक किसान से ख़रीद की अधिकतम मात्रा तय होती है, उससे ज़्यादा उपज खुले बाज़ार में ही बेचनी होगी
  4. बोरे, तुलाई और ढुलाई के नियम हर केंद्र पर पहले से पूछ लें
  5. किसी बिचौलिये के नाम पर पंजीकरण न करवाएं — यह ग़ैरक़ानूनी है और भुगतान अटक जाता है

एमएसपी और मंडी भाव में चुनाव कैसे करें

कई बार खुले बाज़ार का भाव एमएसपी से ऊपर चला जाता है। ऐसे में मंडी में बेचना ज़्यादा फ़ायदेमंद रहता है, क्योंकि वहां भुगतान तुरंत मिल जाता है और पंजीकरण-सत्यापन का झंझट नहीं होता।

इसलिए बेचने से पहले दोनों की तुलना करें — मंडी भाव देखने का तरीक़ा हमने अलग लेख में विस्तार से बताया है।

एमएसपी की दरें, ख़रीद की तारीख़ें, पंजीकरण पोर्टल और मात्रा की सीमा हर सीज़न बदलती है। बेचने से पहले राजस्थान सरकार की आधिकारिक अधिसूचना या नज़दीकी क्रय-विक्रय सहकारी समिति से ताज़ा जानकारी ज़रूर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एमएसपी कौन तय करता है?

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग यानी CACP हर सीज़न से पहले सिफ़ारिश करता है, और उसके आधार पर केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति अंतिम एमएसपी घोषित करती है।

क्या हर फसल एमएसपी पर ख़रीदी जाती है?

नहीं। एमएसपी कई फसलों के लिए घोषित होता है, लेकिन सरकारी ख़रीद मुख्य रूप से गेहूं, धान और कुछ चुनी हुई दलहन-तिलहन फसलों की होती है, वह भी तय मात्रा और तय अवधि में।

ख़रीद केंद्र पर उपज अस्वीकार क्यों हो जाती है?

सबसे आम कारण नमी की मात्रा तय सीमा से ज़्यादा होना है। इसके अलावा टूटे दाने, मिट्टी-कंकड़ की मिलावट और सिकुड़े दानों का अनुपात ज़्यादा होने पर भी उपज लौटाई जा सकती है।

संवाददाता

सुनीता बिश्नोई

सुनीता बिश्नोई कृषि विज्ञान में स्नातकोत्तर हैं और मरुस्थलीय खेती, कम पानी वाली फसलों और ड्रिप सिंचाई पर लिखती हैं। वे महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों के साथ काम करने का अनुभव रखती हैं।

मिलते-जुलते लेख

अपनी बात कहिए

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा।