प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: ओलावृष्टि और सूखे में फसल का नुकसान कैसे भरपाई करवाएं

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना — मरुधरा किसान
४ मिनट का पठन

पश्चिमी राजस्थान में मौसम का कोई भरोसा नहीं। कभी बारिश इतनी कम कि बुवाई ही बेकार चली जाए, कभी फरवरी-मार्च में ओला गिरकर पकी हुई सरसों बिछा दे। ऐसे में फसल बीमा ही वह सहारा है जो पूरे साल की मेहनत को शून्य होने से बचाता है।

लेकिन ज़्यादातर किसान क्लेम इसलिए नहीं ले पाते क्योंकि उन्हें प्रक्रिया की सही जानकारी नहीं होती — ख़ासकर 72 घंटे वाला नियम, जो सबसे अहम है।

प्रीमियम कितना देना होता है

यह योजना की सबसे बड़ी खूबी है। किसान को बहुत कम हिस्सा देना पड़ता है, बाकी सरकार भरती है।

फसल का प्रकारकिसान का प्रीमियम
खरीफ (बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार, मूंगफली)बीमित राशि का 2%
रबी (गेहूं, सरसों, चना, जौ)बीमित राशि का 1.5%
व्यावसायिक और बागवानी फसलेंबीमित राशि का 5%

मान लीजिए आपकी सरसों की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर ₹40,000 है। रबी की दर 1.5% के हिसाब से आपको सिर्फ़ ₹600 प्रति हेक्टेयर देना होगा। बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं।

किन हालात में नुकसान कवर होता है

  • बुवाई न हो पाना — बारिश न होने या पानी की कमी से बुवाई ही न कर पाएं
  • खड़ी फसल का नुकसान — सूखा, लंबा सूखा अंतराल, बाढ़, जलभराव, कीट-रोग का व्यापक प्रकोप, प्राकृतिक आग, बिजली गिरना, तूफ़ान, ओलावृष्टि, चक्रवात
  • कटाई के बाद का नुकसान — फसल काटकर खेत में सुखाने के लिए रखी हो और उसी दौरान बेमौसम बारिश या चक्रवात से नुकसान हो जाए। यह कवर कटाई के बाद अधिकतम 14 दिन तक मिलता है
  • स्थानीय आपदाएं — ओलावृष्टि, भूस्खलन, बादल फटना, जलभराव जैसी घटनाएं जो सिर्फ़ कुछ खेतों को प्रभावित करें

क्या कवर नहीं होता

  • युद्ध या परमाणु जोखिम से हुआ नुकसान
  • जानबूझकर की गई लापरवाही
  • पालतू या जंगली जानवरों द्वारा चराई और नुकसान
  • चोरी

आवेदन कैसे और कब करें

बुवाई के बाद, राज्य सरकार द्वारा तय अंतिम तारीख़ से पहले आवेदन करना होता है। खरीफ और रबी दोनों के लिए अलग-अलग कट-ऑफ तारीख़ें होती हैं और ये हर साल बदलती हैं।

  1. pmfby.gov.in पर जाएं या नज़दीकी ई-मित्र/सीएससी केंद्र पर संपर्क करें
  2. अगर आपने फसली ऋण (केसीसी) लिया है तो बैंक अपने आप बीमा कर देता है — बस पुष्टि कर लें
  3. ज़मीन के कागज़, आधार, बैंक पासबुक और बुवाई प्रमाण पत्र तैयार रखें
  4. बोई गई फसल का सही नाम दर्ज करवाएं — यहां ग़लती हुई तो क्लेम अटक जाएगा
  5. प्रीमियम जमा करके रसीद ज़रूर लें और संभालकर रखें

बुवाई प्रमाण पत्र में जो फसल लिखी है और खेत में जो फसल खड़ी है, दोनों एक होनी चाहिए। सर्वे के समय अंतर मिला तो क्लेम खारिज हो सकता है।

नुकसान हो जाए तो — 72 घंटे का नियम

यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है। अगर ओलावृष्टि, जलभराव या भूस्खलन जैसी स्थानीय आपदा से आपकी फसल को नुकसान पहुंचा है, तो घटना के 72 घंटे के अंदर सूचना देना अनिवार्य है।

सूचना देने के तरीके:

  • Crop Insurance मोबाइल ऐप से — सबसे आसान और इसमें रिकॉर्ड भी बन जाता है
  • बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर
  • नज़दीकी कृषि विभाग कार्यालय या कृषि पर्यवेक्षक को लिखित में
  • जिस बैंक से ऋण लिया है, उस शाखा में

सूचना देते समय अपना पॉलिसी नंबर, खसरा नंबर, फसल का नाम, नुकसान की तारीख़ और अनुमानित प्रतिशत बताइए। नुकसान की फ़ोटो और वीडियो ज़रूर लें — तारीख़ और लोकेशन के साथ। यह सर्वे के वक़्त बहुत काम आता है।

सर्वे और भुगतान

सूचना मिलने के बाद बीमा कंपनी का सर्वेयर खेत पर आता है और नुकसान का आकलन करता है। सर्वे के समय खुद मौजूद रहिए और सर्वे रिपोर्ट पर दस्तख़त करने से पहले उसे पढ़ लीजिए।

व्यापक नुकसान की स्थिति में आकलन फसल कटाई प्रयोग के आधार पर होता है, जिसमें पूरे पटवार मंडल की औसत उपज की तुलना पिछले सालों के औसत से की जाती है। ऐसे मामलों में भुगतान में कुछ महीने लग सकते हैं।

क्लेम की राशि सीधे आपके बैंक खाते में आती है।

शिकायत कहां करें

अगर क्लेम खारिज हो गया या राशि कम लगे, तो पहले बीमा कंपनी के ज़िला प्रतिनिधि से लिखित शिकायत करें। संतुष्ट न हों तो ज़िला स्तरीय संयुक्त समिति और उसके बाद राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति के पास जा सकते हैं।

योजना की शर्तें, प्रीमियम दरें और अंतिम तारीख़ें राज्य और मौसम के हिसाब से बदलती हैं। आवेदन से पहले pmfby.gov.in या राजस्थान कृषि विभाग से मौजूदा अधिसूचना ज़रूर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

फसल बीमा में प्रीमियम कितना देना पड़ता है?

खरीफ फसलों के लिए बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और व्यावसायिक या बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत। बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भरती हैं।

नुकसान की सूचना कितने समय में देनी होती है?

व्यक्तिगत स्तर के नुकसान जैसे ओलावृष्टि या जलभराव की स्थिति में 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी, कृषि विभाग या क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के ज़रिए सूचना देना ज़रूरी है।

क्या फसल बीमा सबके लिए अनिवार्य है?

नहीं। साल 2020 से यह योजना सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक कर दी गई है, जिनमें केसीसी वाले किसान भी शामिल हैं। अगर आप बीमा नहीं चाहते तो बैंक को तय समय से पहले लिखित में बताना होता है।

संपादक

रामनिवास चौधरी

रामनिवास चौधरी बीकानेर के रहने वाले हैं और पिछले 12 साल से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे सरकारी योजनाओं को आसान भाषा में समझाने और किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने का काम करते हैं। श्री गंगानगर और बीकानेर की मंडियों पर इनकी गहरी पकड़ है।

मिलते-जुलते लेख

अपनी बात कहिए

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा।