किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): कम ब्याज पर खेती के लिए लोन कैसे लें

किसान क्रेडिट कार्ड — मरुधरा किसान
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बुवाई का समय आता है और जेब खाली होती है। बीज चाहिए, खाद चाहिए, डीज़ल चाहिए, मज़दूरी देनी है। ऐसे में बहुत से किसान गांव के साहूकार से कर्ज़ उठा लेते हैं — और फिर ब्याज का ऐसा चक्र शुरू होता है जो सालों तक नहीं टूटता।

किसान क्रेडिट कार्ड इसी चक्र को तोड़ने के लिए बना है। सही तरीके से इस्तेमाल करें तो यह खेती का सबसे सस्ता कर्ज़ है।

केसीसी है क्या

यह एक तरह की चलती-फिरती ऋण सीमा है जो बैंक आपके नाम मंज़ूर कर देता है। ज़रूरत पड़ने पर आप उसमें से पैसा निकालते हैं और ब्याज सिर्फ़ उतनी ही रकम पर लगता है जितनी आपने निकाली, उतने ही दिनों के लिए।

यानी अगर आपकी सीमा ₹1 लाख है और आपने सिर्फ़ ₹30,000 निकाले, तो ब्याज ₹30,000 पर ही लगेगा। यह सामान्य टर्म लोन से बिल्कुल अलग बात है और इसी में इसका फ़ायदा छिपा है।

केसीसी आमतौर पर पांच साल के लिए जारी होता है, जिसमें हर साल सीमा की समीक्षा होती है।

ब्याज दर और वह छूट जो ज़्यादातर लोग चूक जाते हैं

अल्पकालीन फसली ऋण पर आमतौर पर 7% ब्याज लगता है। लेकिन असली फ़ायदा इसके आगे है।

अगर आप ऋण नियत तारीख़ से पहले चुका देते हैं, तो सरकार की ब्याज छूट योजना के तहत 3% की अतिरिक्त छूट मिलती है। यानी प्रभावी ब्याज दर घटकर लगभग 4% रह जाती है।

यही वह जगह है जहां ज़्यादातर किसान चूक जाते हैं। तारीख़ निकल जाने के बाद न सिर्फ़ 3% की छूट हाथ से जाती है, बल्कि पूरी अवधि पर सामान्य दर से ब्याज लगता है। फसल बिकते ही खाता चुकता कर देना सबसे समझदारी का काम है।

एक व्यावहारिक तरीक़ा यह है कि फसल बेचने के तुरंत बाद पूरा बकाया जमा कर दें और अगले दिन फिर से ज़रूरत भर की रकम निकाल लें। खाता नियमित रहता है, छूट भी मिल जाती है।

बिना गारंटी कितना मिलता है

एक तय सीमा तक के कृषि ऋण के लिए बैंक कोई गारंटी या ज़मीन गिरवी नहीं मांग सकता। यह सीमा भारतीय रिज़र्व बैंक तय करता है और समय-समय पर बढ़ाता रहा है। इससे ऊपर की राशि पर ज़मीन बंधक रखनी पड़ती है।

चूंकि यह सीमा बदलती रहती है, आवेदन से पहले अपनी बैंक शाखा से मौजूदा सीमा की पुष्टि ज़रूर कर लें।

सीमा कैसे तय होती है

बैंक आपकी ऋण सीमा तीन बातों से तय करता है:

  • आपके पास कितनी ज़मीन है
  • आप कौन सी फसल बोते हैं
  • उस फसल के लिए ज़िले का तय वित्तीय मान (scale of finance) क्या है

हर ज़िले की तकनीकी समिति हर फसल के लिए प्रति हेक्टेयर लागत तय करती है। उसी के हिसाब से गुणा करके आपकी सीमा निकलती है। इसमें फसल की देखभाल के अलावा घरेलू ज़रूरत और कृषि उपकरणों के रखरखाव का हिस्सा भी जुड़ता है।

किन कामों के लिए मिलता है

  • बीज, खाद, कीटनाशक और फसल की देखभाल का ख़र्च
  • कटाई के बाद का ख़र्च
  • कृषि उपकरणों का रखरखाव
  • डेयरी और पशुपालन — गाय, भैंस, बकरी
  • मुर्गी पालन और मत्स्य पालन

पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए ऋण सीमा फसली ऋण से अलग होती है।

ज़रूरी दस्तावेज़

  • भरा हुआ आवेदन फॉर्म
  • आधार कार्ड और पैन कार्ड
  • ज़मीन के कागज़ — जमाबंदी की नकल, खसरा-खतौनी
  • दो पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
  • बैंक खाते का विवरण
  • कहीं और से कृषि ऋण न होने का घोषणा पत्र

आवेदन की प्रक्रिया

  1. जिस बैंक में आपका खाता है, उसी शाखा में जाएं — प्रक्रिया आसान रहती है
  2. केसीसी आवेदन फॉर्म लें, या बैंक की वेबसाइट से डाउनलोड करें
  3. फॉर्म भरकर दस्तावेज़ों के साथ जमा करें
  4. बैंक ज़मीन के रिकॉर्ड का सत्यापन करवाता है और गांव में नोटिस चस्पा होता है
  5. सब ठीक रहा तो कुछ हफ़्तों में कार्ड और पासबुक मिल जाती है

सहकारी बैंक और ग्रामीण बैंक भी केसीसी जारी करते हैं। बीकानेर संभाग में बहुत से किसान सहकारी समिति के ज़रिए फसली ऋण लेते हैं — वह भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है।

ध्यान रखने वाली बातें

  • ऋण का इस्तेमाल खेती में ही करें। दूसरे कामों में लगाने पर खाता अनियमित होता है और आगे सीमा बढ़ाने में दिक़्क़त आती है
  • हर साल खाते का नवीनीकरण करवाएं
  • पासबुक में एंट्री करवाते रहें ताकि हिसाब साफ़ रहे
  • कर्ज़ माफ़ी के इंतज़ार में भुगतान रोकना नुक़सानदेह है — इससे क्रेडिट रिकॉर्ड ख़राब होता है
  • फसल बीमा केसीसी के साथ जुड़ा होता है, उसकी स्थिति भी पूछते रहें

ब्याज दरें, ऋण सीमाएं और छूट की शर्तें बैंक और सरकारी अधिसूचनाओं के हिसाब से बदलती रहती हैं। आवेदन से पहले अपनी बैंक शाखा से मौजूदा नियमों की पुष्टि ज़रूर कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

केसीसी पर ब्याज दर कितनी है?

अल्पकालीन फसली ऋण पर आमतौर पर 7 प्रतिशत ब्याज लगता है। समय पर चुकाने वाले किसानों को 3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलती है, जिससे प्रभावी दर लगभग 4 प्रतिशत रह जाती है।

क्या केसीसी के लिए ज़मीन गिरवी रखनी पड़ती है?

एक तय सीमा तक के कृषि ऋण बिना किसी गारंटी या कोलैटरल के मिलते हैं। यह सीमा भारतीय रिज़र्व बैंक समय-समय पर संशोधित करता है, इसलिए मौजूदा सीमा बैंक शाखा से पुष्टि कर लें।

क्या पशुपालन के लिए भी केसीसी मिलता है?

हां। डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन के लिए भी केसीसी की सुविधा है, हालांकि इसकी ऋण सीमा फसली ऋण से अलग होती है।

संवाददाता

सुनीता बिश्नोई

सुनीता बिश्नोई कृषि विज्ञान में स्नातकोत्तर हैं और मरुस्थलीय खेती, कम पानी वाली फसलों और ड्रिप सिंचाई पर लिखती हैं। वे महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों के साथ काम करने का अनुभव रखती हैं।

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