बीकानेर संभाग की हल्की, रेतीली और भुरभुरी मिट्टी मूंगफली के लिए क़ुदरती तौर पर उपयुक्त है। यही वजह है कि नहरी पानी वाले इलाक़ों में मूंगफली यहां की प्रमुख नक़दी फसल बन चुकी है।
लेकिन पैदावार में किसानों के बीच बड़ा अंतर दिखता है — एक ही इलाक़े में कोई अच्छी फसल ले लेता है और कोई औसत पर अटक जाता है। फ़र्क़ आमतौर पर कुछ बुनियादी बातों में होता है, जिन्हें यहां क्रम से समझते हैं।
खेत की तैयारी
मूंगफली की फली ज़मीन के अंदर बनती है। इसलिए मिट्टी का भुरभुरा होना सिर्फ़ अच्छा नहीं, ज़रूरी है। सख़्त या ढेलेदार मिट्टी में सुई आसानी से नहीं घुस पाती और फली कम बनती है।
- गर्मियों में एक गहरी जुताई करें — इससे मिट्टी में छिपे कीट और रोग के बीजाणु धूप से नष्ट होते हैं
- बारिश के बाद दो-तीन बार हैरो चलाकर मिट्टी भुरभुरी करें
- हर बार पाटा लगाकर खेत समतल करें
- गोबर की सड़ी खाद ज़रूर डालें — रेतीली मिट्टी में यह नमी रोकने की क्षमता बढ़ाती है
बीज और उपचार
बीज हमेशा प्रमाणित स्रोत से लें — कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय या अधिकृत बीज विक्रेता से। बाज़ार से खाने वाली मूंगफली उठाकर बोना सबसे आम और सबसे महंगी ग़लती है।
किस्म का चुनाव अपने इलाक़े के हिसाब से करें। बीकानेर और श्रीगंगानगर के लिए उपयुक्त किस्मों की सलाह कृषि विज्ञान केंद्र या स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर से लेना सबसे भरोसेमंद रहता है, क्योंकि सिफ़ारिशें समय-समय पर बदलती हैं।
बीज उपचार ज़रूर करें
बुवाई से पहले बीज उपचार दो काम करता है — बीजजनित रोगों से बचाव और जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण।
- पहले फफूंदनाशक से उपचार करें
- सूखने के बाद राइज़ोबियम कल्चर लगाएं
- छाया में सुखाकर उसी दिन बुवाई कर दें
क्रम उल्टा न करें — फफूंदनाशक पहले, कल्चर बाद में। सही मात्रा बीज विक्रेता या केवीके से पूछ लें।
बुवाई
- गहराई सबसे अहम है। बहुत गहरा बोया बीज अंकुरित होने में कमज़ोर रहता है, बहुत उथला बोया बीज नमी न मिलने पर सूख जाता है
- कतार में बुवाई करें, छिटककर नहीं। कतार से निराई-गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाना आसान रहता है
- पौधे से पौधे की दूरी बनाए रखें ताकि हर पौधे को फैलने की जगह मिले
बुवाई मानसून की अच्छी बारिश के बाद, जब मिट्टी में पर्याप्त नमी उतर जाए, तभी करें।
जिप्सम — सबसे अहम और सबसे ज़्यादा अनदेखा
यह वह बात है जो पैदावार में सबसे बड़ा फ़र्क़ डालती है, और यही सबसे ज़्यादा छोड़ दी जाती है।
मूंगफली को कैल्शियम चाहिए, और ख़ास बात यह है कि वह कैल्शियम जड़ से नहीं, बल्कि सीधे फली के छिलके से सोखा जाता है। इसलिए कैल्शियम का उस जगह मौजूद होना ज़रूरी है जहां फली बन रही है।
जिप्सम कैल्शियम का सबसे सस्ता स्रोत है और इसमें गंधक भी मिलता है, जो तेल की मात्रा बढ़ाता है।
जिप्सम डालने का सही समय है सुई बनने की अवस्था — यानी जब फूल के बाद सुई निकलकर ज़मीन की तरफ़ बढ़ने लगे। इसे पौधों की कतार के पास डालकर हल्की मिट्टी चढ़ा दें और सिंचाई कर दें।
बुवाई के समय पूरा जिप्सम डाल देना उतना असरदार नहीं होता। मात्रा मिट्टी जांच के आधार पर तय करें।
सिंचाई — दो अवस्थाएं जो चूकनी नहीं चाहिए
मूंगफली को पूरे सीज़न बराबर पानी नहीं चाहिए। दो अवस्थाएं ऐसी हैं जहां नमी की कमी सीधे पैदावार घटाती है:
- सुई बनने की अवस्था — सुई को ज़मीन में घुसने के लिए नम मिट्टी चाहिए। सूखी सख़्त मिट्टी में सुई घुस ही नहीं पाती
- फली भरने की अवस्था — यहीं दाना पुष्ट होता है
इन दोनों में सिंचाई न चूकें। बाक़ी समय ज़रूरत के हिसाब से पानी दें। खुदाई से 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें ताकि फसल ठीक से पक जाए और खुदाई आसान रहे।
ड्रिप या स्प्रिंकलर उपलब्ध हो तो बेहतर — इससे पानी की बड़ी बचत होती है और नमी एक समान रहती है। इस पर सिंचाई सब्सिडी वाला लेख देखें।
निराई-गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाना
शुरुआती 40-45 दिन खरपतवार से मुक्त रखना ज़रूरी है — इसी दौरान खरपतवार सबसे ज़्यादा नुक़सान करते हैं।
गुड़ाई के समय पौधों पर हल्की मिट्टी चढ़ा दें। इससे सुई को घुसने के लिए नरम मिट्टी मिलती है और फली ज़्यादा बनती है।
ज़रूरी सावधानी: एक बार सुई बनना शुरू हो जाए, उसके बाद खेत में गुड़ाई न करें। इससे बन रही सुइयां टूट जाती हैं और सीधा नुक़सान होता है।
प्रमुख रोग और कीट
| समस्या | पहचान | बचाव |
|---|---|---|
| टिक्का रोग | पत्तियों पर गोल भूरे धब्बे | फसल चक्र, समय पर फफूंदनाशक |
| रोसेट | पौधा बौना, पत्तियां पीली-गुच्छेदार | रोगग्रस्त पौधे हटाएं, माहू नियंत्रण |
| सफ़ेद लट | जड़ें कटी, पौधा मुरझाया | गहरी गर्मी की जुताई, प्रकाश प्रपंच |
| दीमक | पौधा सूखकर आसानी से उखड़ जाए | सड़ी गोबर खाद ही डालें, कच्ची नहीं |
कीटनाशक का चुनाव और मात्रा हमेशा कृषि पर्यवेक्षक की सलाह से तय करें।
खुदाई कब करें
यह पहचानना ज़रूरी है, क्योंकि जल्दी खोदने पर दाना कच्चा रहता है और देर करने पर फली ज़मीन में ही टूटकर रह जाती है।
जांच का तरीक़ा: कुछ पौधे उखाड़कर फली तोड़िए। अगर छिलके के अंदर की तरफ़ काली-भूरी धारियां बन चुकी हैं और दाने का छिलका अपने रंग में आ गया है, तो फसल तैयार है।
खुदाई के बाद फलियों को पौधे सहित कुछ दिन खेत में सुखाएं, फिर अलग करें। भंडारण से पहले नमी अच्छी तरह सुखाना ज़रूरी है — गीली मूंगफली में फफूंद लगती है, जो न सिर्फ़ दाम गिराती है बल्कि सेहत के लिए भी नुक़सानदेह होती है।
बेचने से पहले मंडी भाव ज़रूर देख लें — ठीक से सुखाई गई मूंगफली पर भाव सीधे बेहतर मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मूंगफली में जिप्सम क्यों ज़रूरी है?
मूंगफली की फली ज़मीन के अंदर बनती है और कैल्शियम सीधे फली के छिलके से सोखा जाता है, जड़ से नहीं। जिप्सम कैल्शियम का सस्ता स्रोत है, जिससे फली अच्छी भरती है और दाना पुष्ट बनता है।
मूंगफली की खुदाई का सही समय कैसे पहचानें?
कुछ पौधे उखाड़कर फली तोड़िए। अगर छिलके के अंदर की तरफ़ काली-भूरी धारियां बन चुकी हैं और दाने का छिलका अपने रंग में आ गया है, तो फसल खुदाई के लिए तैयार है।
रेतीली मिट्टी में मूंगफली के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
नमी का जल्दी उड़ जाना। ख़ासकर सुई बनने और फली भरने की अवस्था में नमी की कमी सीधे पैदावार घटाती है, इसलिए इन दोनों अवस्थाओं में सिंचाई नहीं चूकनी चाहिए।